पेप्परफ्राई ने एक्सिस्टिंग अन्जेल्स से २१० करोड़ का वित्तपोषण उठाया

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पेप्परफ्राई ने मौजूदा निवेशकों से २१० करोड़ का फंड उठाया

ऑनलाइन फर्नीचर और होम डेकॉर के मार्केटप्लेस पेप्परफ्राई ने २१० करोड़ का वित्तपोषण गोल्डमैन सच्स, नॉरवेस्ट वेंचर पार्टनर्स, बेर्टेलमैन इंडिया इन्वेस्टमेंट्स और जोड़ीअस टेक्नोलॉजी फंड से प्राप्त किया है। इस मुंबई स्थित कंपनी को पूर्व ईबे के अधिकारी अंबरीश मूर्ति और आशीष शाह ने स्थापित किया है। बतादें की यह कंपनी आने वाले चार हफ्तों में १५० करोड़ से लेकर २०० करोड़ रूपये अपने नए इन्वेस्टर्स के टीम के साथ मिलकर उठा सकती है।

ईटेलिंग इंडिया का विचार मंथन

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फर्नीचर बाजार के खिलाड़ियों की नजर विकास के अवसर पर टिकी हुई है

अंबरीश मूर्ति का यह कहना है की आने वाले वर्ष २०१७ में ऑनलाइन फर्नीचर की बिक्री दुगनी हो जाएगी, जो की ३० करोड़ से ६५ करोड़ की होगी। उनका यह भी कहना है की फ़िलहाल मार्केट का ५०% शेयर हमारे हिस्से में है। फ़िलहाल की बात करें तो भारतीय फर्नीचर इंडस्ट्री ३० अरब से ३५ अरब डॉलर की हो गयी है। वहीं मॉर्गन स्टैनले का यह अनुमान है की, ऑनलाइन फर्नीचर और डेकॉर मार्केट वर्ष २०२० तक ६.१ अरब डॉलर का हो जाएगा।

फर्नीचर ऑनलाइन मार्केट के लिए एक बड़ा मुनाफे का जरिया होने के साथ एक अच्छा सफल मुनाफा ( २०% से ५०%) वापस देता है। मगर वहीँ बाकि सेग्मेंट्स की तरह, इस में भी समय-समय पर अलग-अलग मुश्किलें और चुनौतियां सामने आती रहती हैं।

प्रमुख चुनौतियां:

फर्नीचर और होम डेकॉर फॉर्मेट का एक ही तरीका सभी के पसंद के श्रेणी में बसता नहीं। इस सेगमेंट में एक बड़ी चुनौती वर्गीकरण की पेशकश में असमर्थता भी है। वहीं अगर बड़ी छूट भी दी जाती है, तो वह इस मार्केट में टिके रहने में इतना फायदेमंद सभी नहीं होगी। इस सब से बचने के लिए ओमनी चैनल का रास्ता सबसे सही है, क्यों की वहां ऑनलाइन और ऑफलाइन स्टोर की कीमत में कोई फरक नहीं है। साथ ही इस मार्केट में लोजिस्टिक्स भी एक बड़ी चुनौती है। इस के लिए समर्पित परिवहन वाहन की जरुरत है। कम सामान होने के कारण ट्रक की पूरी जगह इस्तेमाल नहीं की जाती है। इस लिए लोजिस्टिक्स में १०% से १५% खर्च हो जाता है, यह अल्वारेज़ एंड मार्सल के प्रबंध निदेशक मनीष सैगल का कहना है।

इस क्षेत्र में अधिक संरचना लाना ग्राहकों के लिए और अधिक पारदर्शिता लाएगा। इससे एक अच्छी बात यह निकल कर आ रही है की, दोनों ऑनलाइन और ऑफलाइन इंडस्ट्री मिल कर साथ में अपना कारोबार चला सकते हैं, क्यों की भारतीय ग्राहकों की पसंद में बहुत विभिन्नता है।

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